भारतीय लोकसंगीत का डिजिटल संरक्षण: चुनौतियाँ और संभावनाएँ

Authors

  • Suma M . S Hindi club India Foundation , Thrissur, Kerala, India Author

DOI:

https://doi.org/10.63090/IJILRS/3108.1797.0020

Keywords:

लोकसंगीत, डिजिटल संरक्षण, अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर, नृवंशसंगीतशास्त्र, सांस्कृतिक संवेदनशीलता, बौद्धिक संपदा

Abstract

यह शोध-पत्र भारतीय लोकसंगीत के डिजिटल संरक्षण से जुड़ी समकालीन चुनौतियों और संभावनाओं का विश्लेषण प्रस्तुत करता है। भारत के पास क्षेत्रीय भाषाओं, समुदायों और अनुष्ठानिक संदर्भों में निहित अत्यंत समृद्ध और विविध लोकसंगीत परंपरा है, किंतु वैश्वीकरण, शहरी पलायन और व्यावसायिक लोकप्रिय संगीत के प्रभुत्व के दबाव में इनमें से अनेक परंपराएँ तेजी से विलुप्त हो रही हैं। डिजिटल प्रौद्योगिकी दस्तावेजीकरण, पहुँच और पुनरुद्धार के सशक्त उपकरण प्रदान करती है, परंतु यह प्रामाणिकता, सांस्कृतिक संदर्भ, बौद्धिक संपदा और प्रस्तुतकर्ता समुदायों के अधिकारों से जुड़े गंभीर प्रश्न भी उठाती है। नृवंशसंगीतशास्त्र, अभिलेखागार सिद्धांत और यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की अवधारणा के आधार पर यह अध्ययन भारतीय लोकसंगीत की विविधता, उसके ह्रास के कारण, वर्तमान संरक्षण प्रयास, तथा डिजिटल संग्रहण के अवसरों और खतरों का मूल्यांकन करता है, और एक समुदाय-केंद्रित नैतिक ढाँचा प्रस्तावित करता है।

Author Biography

  • Suma M . S, Hindi club India Foundation , Thrissur, Kerala, India

    Principle 

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Published

2026-06-25

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Articles